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कविता सुश्री मिलिका लिलिक, मूल रचनाकार, सर्बिया (योरोप) की प्रख्यात वरिष्ठ कवयित्री ‘मिलिका लिलिक’ (Milica Lilic)  अनुवादक: पूना की प्रतिष्ठित लेखिका एवं पूर्व प्रोफैसर सुश्री दीप्ति गुप्ता  दूरी का स्पर्श दूर की बात जान लेने वाले मेरे हाथ  जादू-टोने वाले ओझा के हाथों  की तरह तपते हुए मेरी सोच के अनुसार जुम्बिश करते है  अपनी चुनी हुई चीज को छूते हैं ! ऐसे ही एक पल में वे तुमसे टकराए थे  वे आँखों से बेहतर देख पा रहे थे  उन्होंने निर्दोषता से मेरी रहनुमाई की  तुम्हारा वजूद और एहसासत हमेशा  मुझे आकर्षित करते रहे ! मैं एक या दो ही शब्द लिखती हूँ के  तभी अपने भीतर और आस-पास इन्द्रधनुष  की झलक का एहसास होता है  तेज गति वाली दो जल-धार  जैसे परस्पर विलय हुई हों  शब्दों की शक्ति से परिचित  यह उनको नीचे की ओर गति से बहाता है  मूल की शक्ति से समन्वित हुए मन में जो खरा है और सच्चा है, वो  अन्तरतम की तपिश से बाहर की ओर  अंदर के गहन रास्ते से बह निकलता है मैं शब्दों को एक-एक करके छूती हूँ  वे सहज ही ऊर्जा का संचार करते हैं  इनका आप तक पहुँचना  आपको उल्लास से भरता है  तभी तुम मेरे लिए सारे दरवाज़े  खो