सरहद

सरहद हम से क्या चाहती है।


सरहद हम से वफ़ा चाहती है।


दीवारों का होना अगर है जरूरी


सरहद सब की रजा चाहती है।


माजी को अब तो भुलाना ही होगा


सरहद ताजा हवा चाहती है।


मुश्तरका आसमानों से पूछो


सरहद कसे अदा चाहती है।


सब को सबकी खुशियाँ मुबारक


सरहद सब का भला चाहती है।


‘सतलुज, ‘रावी’, ‘व्यासा’ का पानी


सरहद ‘सागर’ मजा चाहती है।  



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