ग़ज़ल

ग़ज़ल


 


इन ज़ख़्मों को भरना होगा


फिर यादों में ढ़लना होगा


 


जीवन इक है चलता पहिया


हर राही को चलना होगा


 


जब तक धरती चाँद सितारे


मानव को कुछ करना होगा


 


जीवन जीना आसान कहाँ है


पलपल हमको लड़ना होगा


 


उल्फत करना मत भूलो तुम


पाठ यही इक पढ़ना होगा


 


प्रभु को दिल में हरदम रक्खो


इतना सिमरन करना होगा I



 


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