हकीम नेजामी गंजवी


हकीम नेज़ामी गंजवी अपने समय के क्लासीकल कविओं में एक महत्त्वपूर्ण दर्जा रखते थे, दास्तान सराई के एक महान कवि थे। 1141 में गंज में जन्म लिया और जीवन का अधिकांश समय वहीं गुज़ारा। वह अपने समय के सभी शास्त्रों के विद्वान माने जाते थे साथ ही पद्य व गद्य में भी अपना ऊँचा स्थान रखते थे। नेज़ामी के ग्रंथों में उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ''खमसे” है जिसमें पाँच लम्बी मस्नवी* हैं। “मख़ज़न-अल-असरार'', “लैला व मजनू, खुसरू व शीरीन, हफत पेकर या हफ्त गुंबद, सिकन्दरनामा। नेज़ामी मस्नवी के बेजोड़ कवि, जन्मदाता माने गये हैं। यह सच है कि इनके इस स्रोत से अन्य कवियों ने जैसे ख्वाजू, जामी, वहशी वगैरह ने प्रेरणा ली है और इसी रंग में रंगे अमूल्य काव्य-खण्ड फारसी साहित्य को दिये हैं।


*मस्नवी: उर्दू पद्य की एक क़िस्म, जिसमें कोई कहानी या उपदेश एक ही वृत्त में होता है और उसका हर शे'र दूसरे शे'र से रदीफ़ क़ाफ़िए में नहीं मिलता और हर शे'र के दोनों मिस्रें सानुप्रास होते हैं।


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