जख़्म

अभी ना छुना अभी जख्म बहुत ताज़ा है


अभी अभी तो गहरी चोट खाई है


वक़्त पाकर खुद ही भर जायेगा


तब तुम अपने कोमल, प्यार भरे


स्पर्श से सहला देना


लेकिन अभी जख्म बहुत गहरा है


अभी ना छुना जख़्म बहुत ताज़ा है



Popular posts from this blog

अभिनव इमरोज़ दिसंबर 2021 अंक

कर्मभूमि एवं अन्य उपन्यासों के वातायन से प्रेमचंद      

भारतीय साहित्य में अन्तर्निहित जीवन-मूल्य