यह बसन्ती ख़त

मेरे हाथ में तुम्हारा ख़त है


तुम्हारा ख़त


या


तुम्हारे हाथ का एहसास?


शायद इतने


कि, जितने एक बाग के फूल।


मेरी ज़िन्दगी से तुम्हारा चले जाना


उदासी का एक एहसास था


पर, तुम्हारे इस ख़त का आना


बसन्त का आगमन है।


यह बसन्ती ख़त


जिसका एक-एक शब्द


किसी फूल की तरह सुन्दर


और खुश्बूदार है


मैंने अपनी मिल्कियत में


इसे जमा कर लिया है


हाँ, तुम्हारे ख़त, तुम्हारे एहसास ही


मेरी मिल्कियत हैं


मेरे पतझड़ से जीवन में


जैसे बसन्त की मिल्कियत।


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