कविता


संजय भारद्वाज, पूणे  मो. 9890122603


नेह और सौहार्द का प्रह्लाद चिरंजीव रहे। आपको एवं आपके परिवार को होली एवं धूलिवंदन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ


मेरे लिखे खत
जब-जब उसने
आग को दिखाए,
कागज जल गया
हर्फ उभर आये,
झुंझलाई, भौंचक्की-सी
हुई बार-बार दंग
कई होलिकाएँ जल मरीं
प्रह्लाद सिद्ध हुआ
हर बार मेरे प्रेम का रंग!


 


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