साहित्य नंदिनी आवरण पृष्ठ 1


बीसवीं सदी की पंजाबी कहानी: पंजाबी में आधुनिक साहित्य के रूप में कहानी का आरंभ बीसवीं सदी में ही हुआ। एक सदी से भी कम की अवधि में विभिन्न पड़ावों से गुज़रते हुए इसने बहुत विकास किया है। इस विधा के आरंभिक रचनाकार तो बीसवीं सदी के दूसरे-तीसरे दशक से ही उभरने लगे थे। मुख्यतः प्रामाणिक रूप में आधुनिक पंजाबी कहानी तब उभर कर सामने आई, जब संत सिंह सेखों, देवेंद्र सत्यार्थी, सुजान सिंह तथा कर्तार सिंह दुग्गल जैसे लेखकों ने इस विधा में रचना करनी शुरू की और बीसवीं सदी के चैथे दशक में अपनी शुरुआती पुस्तकें प्रकाशित करवाईं। तब से लेकर सदी के अंत तक लिखी जाने वाली पंजाबी कहानी के नैन-नक्श इन आरंभिक वर्षों में ही तय हो गए थे। पहले दौर में जहाँ इसमें सुधारवाद का अंश अधिक था तो फिर बाद में उसमें प्रगतिवाद का प्रभाव बढ़ गया। सदी के अंत तक पहुँचते हुए इसने सूक्ष्म यथार्थवादी रंग अपना लिया। विस्तृत सामाजिक सामूहिक समस्याओं से लेकर व्यक्ति के तौर पर स्त्री-पुरुष की भीतरी असलियत को भी पंजाबी कहानी ने बखूबी प्रस्तुत किया।


आधुनिक पंजाबी कहानी का यह सौभाग्य ही है कि इसे आरंभ से ही बेहद प्रतिभावान रचनाकार मिले तो बाद के समय में भी इसमें रुचि रखने वाले समर्थ रचनाकारों की कोई कमी नहीं रही।


कुलवंत सिंह विर्क से लेकर वरिथाम सिंह संधू तक साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित लगभग एक दर्जन लेखकों सहित पंजाबी में प्रतिभावान कहानीकारों की लंबी सूची कई सैकड़ों तक पहुँचती है। किसी भी अन्य विधा के मुकाबले में पंजाबी में कहानी की उपलब्धि कलात्मक स्तर पर भी और पाठकों की ओर से मिलती स्वीकृति के स्तर पर भी सबसे अधिक मूल्यवान कही जा सकती है। प्रस्तुत संग्रह में समूची सदी के सौ लेखकों की कहानियाँ शामिल की गई हैं, जिन्होंने किसी न किसी पहलू से आधुनिक कहानी को विकसित करने में बहुत योगदान दिया है। इनमें से सबसे पहले लेखक चरन सिंह शहीद (1881-1935) और सबसे आखिरी रचनाकार अजमेर सिद्ध (1970) में लगभग एक सदी जितना अंतर है।


रघबीर सिंह: (जन्म: 1939) पंजाबी साहित्यिक आलोचना में गल्प के विशेष आलोचक लगभग चार दशकों से साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका सर्जना का संपादन करते आ रहे हैं। आप पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला में पंजाबी के प्रोफेसर तथा विभागाध्यक्ष रह चुके हैं और पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से पंजाबी के प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।


जसविंदर कौर बिंद्रा: (जन्म: 1959) दिल्ली यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र तथा पंजाबी साहित्य में एम.ए. तथा पंजाबी साहित्य में पी-एच.डी.। कई महाविद्यालयों में पंजाबी विभाग में अध्यापन कार्य। हिंदी-पंजाबी दोनों भाषाओं में समान अधिकार से लिखने वाली लेखिका, अनुवादिका तथा आलोचक हैं। आलोचना की तीन मौलिक पुस्तकों के साथ अनेक पुस्तकों तथा पत्र-पत्रिकाओं में आलोचनात्मक लेख शामिल। अंग्रेजी, हिंदी तथा पंजाबी में करीब 35 पुस्तकों का अनुवाद।। नेशनल बुक ट्रस्ट, साहित्य अकादेमी, वाणी प्रकाशन, भारतीय ज्ञानपीठ, पटियाला युनिवर्सिटी, पटियाला, प्रभात प्रकाशन जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों से पुस्तकें प्रकाशित । पंजाबी अकादमी, दिल्ली से अनुवाद पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों-सम्मानों से विभूषित ।      


आवरण सज्जा: विजेंद्र एस विज                     


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