लचारी की ललकार


प्रेरणा सागवान, अजमेर, मो. 9636639952


दुख पुरुष


दुख से मेरा
आज का नहीं
युगों पुराना जन्म
जन्मान्तर का सम्बन्ध है
मेरे इस संबंध 
पर कोई लांछन
मत लगाओ
मेरे दुःख प्रेमी
का अपमान न करो
इस का सम्बन्ध
मेरी देह से नहीं
आत्मा से है
सूर्य की भाँति तेजवान है
मेरा दुःख पुरुष।
दुख का वियोग
मेरी मृत्यु भी बन सकता है
मैं धरती के वक्ष स्थल पर
रेत की तरह बिखर जाऊँगी
मेरे वक्ष पर दुख
लिखेगा प्रेम की
अमर परिभाषा 
और जीवन का इतिहास।


Popular posts from this blog

कर्मभूमि एवं अन्य उपन्यासों के वातायन से प्रेमचंद      

एक बनिया-पंजाबी लड़की की जैन स्कॉलर बनने की यात्रा

अभिनव इमरोज़ सितंबर अंक 2021