व्यक्तित्व विशेष: डाॅ. अहिल्या मिश्र

Mridula Sinha

Former Governor of Goa

Founder Editor of "Panchavan Stambh"

शुभकामना संदेश

एक युग में संस्कृति, संस्कार और स्त्री पुरुष में विद्वता के लिए प्रसिद्ध मिथिलांचल क्षेत्र के सागरपुर गाँव (मधुबनी जिला) में स्व. रमानंद मिश्र, स्वतंत्रता सेनानी के घर में लक्ष्मी का आगमन हुआ। सारा परिवार, आनंदित था, लेकिन उस समय किसी को यह अनुमान नहीं था कि वह लक्ष्मीस्वरूपी बिटिया हिन्दी साहित्य की सेवा करती हुई, कई देशों में भ्रमण कर भारवर्ष में साहित्य सेवा के नाते यशस्वी हो जाएगी।

50 वर्षों से हैदराबाद में अपने पति श्री राजदेव मिश्र और एक पुत्र मानवेन्द्र मिश्र, पुत्रवधू, आशा मिश्र और दो पोता-पोतियों के साथ रहती, अहिल्या मिश्र ने शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रबुद्ध शिक्षिक के नाते अपनी पहचान बनाई।

नव जीवन बालिका की पूर्व प्राचार्य एवं उसी संस्था के विभिन्न पदाधिकारियों के नाते उच्च पदों पर विराजमान रहीं। कई मंत्रालयों (भारत सरकार) में हिंदी सलाहकार समिति की सदस्य भी रहीं।

ये मैथिली, वज्जिका, हिंदी, अंग्रेजी, बंग्ला और तेल्गू भाषा में अच्छी तरह बोल व लिख सकती हैं।

हैदराबाद के सामाजिक वातावरण में रच-बस जाने के बाद इन्होंने 1980 में कविता लिखना प्रारंभ किया। संग्रह का नाम ‘पत्थर-पत्थर-पत्थर’’। इसके बाद इनकी कलम ने कभी विराम नहीं लिया। कहानियाँ, उपन्यास, स्त्री-विमर्श, संस्मरण-संग्रह, समीक्षा, नाटक, संपादन, साहित्य के सभी विधाओं में इनकी लेखनी अनवरत चलती रही। कई पत्रिकाओं की ये संपादक एवं प्रधान संपादक रहीं। इनके साहित्य पर कई थिसिस लिखीं गईं और बिहार, पंजाब, दिल्ली एवं अन्य नगरों से भी इन्हें पुरस्कार मिलना प्रारंभ हुआ। इन पुरस्कारों की भी गति नहीं थीं। अन्यान्य संगठनों की संरक्षक एवं परामश्रदाता बन गईं।

अंतराष्ट्रीय पुरस्कारों में माॅरिशस (1990) में मिला पुरस्कार। 2008 से 2019 तक लगभग सभी वर्षों में एक-न-एक पुरस्कार से सम्मानित होती हुई, अहिल्या मिश्र जी आगे बढ़ती जा रही हैं।

इन्होंने कई संस्थाओं के माध्यम से लोगों को हिन्दी सिखाकर हिन्दी की सेवा की। एम.फिल एवं पीएचडी से भी अलंकृत की गई। माॅरिशस की साहित्यिक यात्रा, यूरोप के फ्रांस, जर्मनी, नीदलैंड, स्वीडन, हाॅलैंड, स्काॅडलैंड, स्पेन की यात्रा, लंदन, नेपाल एवं भूटान देशों की यात्राओं से अनुभव में सदा वृद्धि करती रही हैं और मानव और प्रकृति को विभिन्न रूपों में देखकर एकता स्थापित करते हुए इनका साहित्य उत्तरोत्तर निखार ले रहा है।

इनकी उपलब्धियों में एक बड़ी उपलब्धि है, मैट्रिक पास अपनी बहू को पीएचडी की डिग्री तक प्राप्त करने में मदद करना और उसे आगे बढ़ाने की आकांक्षा रखना।

हिन्दी और साहित्य के अलावे विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से इनका गहरा संबंध और सरोकार है। बिहार ऐसोसिएशन हैदराबाद, ब्रह्मर्षि सेवा संगठन, भाग्यनगर काॅवड सेवा संघ जैसी दस संस्थाओं से आप घनिष्टता से जुड़ी हैं।

मैं डाॅ. अहिल्या मिश्र के लिए शुभकामनाएँ व्यक्त करती हूँ कि उनकी लेखनी निरंतर साहित्य साहित्य यात्रा करती रहेंगी, जिसमें अत्यंत निर्धन व्यक्तियों की कहानी भी होगी, तो उच्च पद पर बैठे बलवानों की कहानियाँ भी।

हिन्दी तेलगू भाषा क्षेत्र में आगे बढाने, निरंतर उसकी सेवा करने के लिए डाॅ. अहिल्या मिश्र जानी जाती रहेंगी। इनकी कलम का यश चहुँदिशा में फैलेगा, ऐसा मेरा विश्वास है।

शुभकामनाओं सहित

(मृदुला सिन्हा)
पूर्व राज्यपाल

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