कविता

    सूर्य प्रकाश मिश्र, वाराणसी, मो. 9839888743


तितली ने फूलों के रस से 

लिख डाली उपवन पर कविता 

गुड़हल, कनेर, बेला, जूही 

चम्पा के जीवन पर कविता 


झूमती नीम, हँसती चिलबिल 

गुलमोहर का सोने सा दिल 

गेंदा गुलाब में द्वितीय कौन 

निर्णय कर पाना है मुश्किल 


क्या अनुभव करती नागफनी 

उसके अन्तर्मन पर कविता 


मदमस्त पड़े हैं हरसिंगार 

लगता है गुजरी है बहार 

सब जान गये हैं, पीपल से 

है अमरबेल का अमर प्यार 


पढ़कर पुरवा मुस्कुरा उठी 

ये अल्हड़ यौवन पर कविता 


सोया - सोया सा है पलाश 

खोया - खोया सा अमलतास 

गुमसुम से इमली के बूटे 

महुवे का पत्ता है उदास 


गुजरी है पतझड़ से होकर 

ऋतु के आकर्षण पर कविता 


गौरैया के बजते नूपुर 

क्या कहते हैं कोयल के सुर 

क्यों हुए न जाने परदेशी 

हैं पिया पपीहे के निष्ठुर 


घर छोड़ के आये मिट्ठू से 

कौवे के अनबन पर कविता