अश्रु

    श्याम बाबू शर्मा, शिलोंग, असम, मो. 9863531572 


मॉल में बिके रिश्तों के पैबंद 

लगे भावों के भाव 

आई सेल सहिष्णुता की 

बोली सम्मान स्वाभिमान की 

नीलाम हए 

उतारे गए अश्रु 

कभी उस्ताद पर 

यकायक माँ की याद पर

 कभी रोकड़ पर 

नहीं मिले 

महरूम पर 

महंगाई पर

औरत की तपिश में आंच पर 

मजहबी खेल पर 

अश्रु नदारद रहे 

उजड़ते घरों पर 

हवस की नग्नता पर 

सुलगते नर कंकाल पर 

कानून के खिलवाड़ पर

अश्रु ..? 

शहादत पर 

आत्म जीवी पोषक आदम पर...



       


Popular posts from this blog

अभिनव इमरोज़ दिसंबर 2021 अंक

कर्मभूमि एवं अन्य उपन्यासों के वातायन से प्रेमचंद      

भारतीय साहित्य में अन्तर्निहित जीवन-मूल्य