रुदन

 

 अरुणा शर्मा, दिल्ली, मो. 9212452654



लिखो

मेरी तुम करूण गाथा व रुदन को 

और 

बनो आवाज मेरी 

मैं, जानती हूँ 

गर, चाहो तो  

पलटा सकते हो तख्ती सत्ता की

व 

ला सकते हो क्रान्ति

लिख सकते हो तकदीर एक अबला की...

गर पता होता 

सहिष्णुता व असहिष्णुता में अंतर 

तो न करते कभी 

इस तरह से अपमान अपने पुरुस्कारों का 

महज राजनैतिक गलियारों के लिए...

हाय !!

आज स्वयं की बेटी की दास्तां पर 

बैठे हो मूक दर्शक बन कर 

व दिख रहे हो असमर्थ 

स्वयं कुछ भी करने के लिए 

पता है न!! नारी महज एक पहेली नहीं?? 

उठो !! लिखो !!

कवि !!

कब लिखोगे ??

मासूम बहन, बेटी, पत्नी, 

एक अबला की तकदीर,

काटोगे सैकड़ो वर्षो से दी गई उत्पीड़न व रोकोगे बलात्कार,

कब जगाओगे?

समाज, देश के प्रति निष्ठा, जन जन में 

और

बन रहे मूक दर्शक देशद्रोहियों को लताड़ोगे 

ताकि आ सके शांति समृद्धि आपसी सद्भाव समझ

रूदन बदल सके हँसी में

ले सके चैन की नींद हम सभी

कवि !!

लिखो !! 

विद्रोही बन करो उपकार राष्ट्र का 

तुम अपनी कलम से... ‘‘अरुणा‘‘