‘‘जो रंग दे वो रंगरेज़’’ (समीक्षा)


 
डाॅ.  सुरेश चन्द्र शर्मा


कहानी संग्रह “जो रंग दे वो रंगरेज”

लेखिका-रोचिका अरुण शर्मा, चेन्नई  

समीक्षक - डॉ. सुरेश चन्द्र शर्मा 

प्रकाशक - बोधि प्रकाशन, जयपुर 

मूल्य - 150 रुपये (अमेजन पर उपलब्ध) 

कहानी संग्रह “जो रंग दे वो रंगरेज” इन दिनों प्रकाशित महिला कथाकारों की कहानियों में एक प्रस्थान बिंदु समान है- इन कहानियों की संवेदना सामान्य मानव के सुख-दुख की ऐसी कहानी है जो उसके मन के भीतर से उद्वेलित हो अनायास बह निकलती है। सहज और सरल भाषा में कथा का ताना-बाना कुछ इस प्रकार बुना गया है जो सहज ही पाठक को अन्दर तक छू जाता है। जीवन की भाग-दौड़ में इन कहानियों के पात्र स्वयं को व्यक्त करते हैं और एक दिशा भी दिखाते हैं। 

प्रतिदिन की दिनचर्या में कहानी के पात्रों के संघर्ष उनकी छटपटाहट और उनके अंतर्द्वंद को बड़ी ही बारीकी से पिरोया गया है। इन कहानियों में विषयों में पात्रों का वैविध्य है और पात्र नयी दिशाओं की खोज करते दिखाई दे रहे हैं। 

पंद्रह कहानियों का यह संग्रह जिनमें संवेदना का वैविध्य तो है ही अभिव्यक्ति की तरलता पाठक को बांधे रखती है। वर्णन की शैली इतनी सुगम है कि पढ़ते हुए एहसास ही नहीं होता कि हमने जग के कितने किस्से सुन लिए। जैसे विधवा महिला आज भी परिवार और समाज द्वारा त्याज्य एवं असुरक्षित है। पुनर्विवाह की सफलता भी प्रश्नचिन्ह ओढ़े रहता है।

“परवाज” कहानी में लेखिका नायिका को उड़ान देती हैं पर कहीं-कहीं आदर्श स्थिति खोजते हुए उपदेशात्मक हो उठती हैं।

कहानी “छोटी सी बात” आज समाज में बेटियों की संवेदनशीलता एवं ज़िम्मेदारी की कहानी है कि विवाह उपरान्त माता-पिता बगैर उसकी तनख़्वाह के घर कैसे चलाएंगे ? इसीलिये वह अपने प्रेम का गला घोंटते रहती है। 

‘बट जॉइंट’ बलात्कार के दंश को झेलती नारी के अंतर्मन की व्यथा-कथा है। वहीं मुस्कुराती सांझ एक प्रेरणादायक कहानी है कि जीवन संध्या में वृद्ध व्यक्ति स्वावलंबी रहें और अपने ही समान वृद्धों से जुड़ कर प्रत्येक सांझ को मुस्कुराती सांझ बना सकते हैं। 

‘वी आर ईडियट्स’ आम घरों की कहानी है जहां माँ-बाप अपने बच्चों पर करियर का बोझ लादना चाहते हैं। 

“गूँज” आज के समाज के वीभत्स रूप को चित्रित करती है। सामाजिक विद्रूपता, नारी की विवशता, पुरुष का छल, एड्स जैसे रोग का संक्रमण,स्वार्थ का कुरूप चेहरा और नारी के नर्क  समान जीवन का कुरूप चित्रण है।      

इस संग्रह में ‘भाग्या’, ‘रंग’, ‘मन का फ्रेम’, ‘कैक्टस’ एवं ‘सुनहरा साहिल’ अपने-अपने संवेदनाओ से युक्त अच्छी कहानियाँ हैं। 

(पूर्व, प्राध्यापक) देशबंधु कॉलेज दिल्ली प्राचार्य मोतीलाल नेहरु कॉलेज, दिल्ली, मो. 9910030715


रौचिका अरुण शर्मा, चेन्नई, मो. 9597172444