संपादकीय


      देवेन्द्र कुमार बहल


 दिनांक - 23-11-2021

आदरणीय गिरीश पंकज जी और प्रो. संजय द्विवेदी जी,

                                         सादर सप्रेम नमस्ते !

आपके बदौलत- कामयाबी-ए-तक़्दीर में एक और अहम इजाफ़ा-तहेदिल से शुक्र गुज़ार हूँ। मेरे लिए यह सम्मान महज़ निशाने इम्तियाज़ी ही नहीं बल्कि मेरी शेष यात्रा को सुकूं याफ़्ता बनाने के लिए उर्जा, प्रेरणा और प्रोत्साहन से लिप्त संजीवनी है। मेरी इज़्ज़त अफ़्जाइ, और आश्नाई का यादग़ारी तमग़ा और ‘अभिनव इमरोज़’ एवं ‘साहित्य नंदिनी के लिए ताबीज़-ए-तरक़्क़ी भी है।

समारोह की सादगी, मेहमान नवाज़ी, इन्तज़ाम इस कद्र सुनियोजित था कि मोहब्वत और ख़ुलूस पूरे प्रबन्धन में नुमायाँ होकर पूरे परिवेश को भव्यता से ओत प्रोत किए हुए था। आत्मतीयता से लबरेज़ आप दोनों के व्यक्तित्व और सुसंस्कारों की तासीर से आप का मुरीद हुए बग़ैर न रह सका।

सात फरवरी शाम को जब घर पहुँचा तो आपके और आप की संस्था के सम्पर्ण भाव से, आप के सहयोगियों के अपनत्व से और पूज्यनीय दादा पं. वृजलाल द्विवेदी जी की बेशक़ीमती साहित्यिक बिरासत से अपने जुड़ाव निमित्त सराबोर तो हुआ ही साथ ही एक ख़ास अदबी अमीराना अहसास भी दिलोदिमाग़ पर तारी रहा और ता-उम्र रहेगा- यह सम्मान के बहाने जो आपका सान्निध्य मिला है वह मेरी जीवन यात्रा के अंतिम पड़ाव पर स्थापित निशाने मील है- जो मुझे हमेशा उत्साहित करता रहेगा। 

पुनः धन्यवाद एवं शुभकामनाएँ

अभिनंदक






(देवेन्द्र कुमार बहल)

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