2021

2021 गुजर रहा है 

थरथराते पुल पर धड़धड़ाती 

बेतहाशा भागती बेकाबू रेलगाड़ी की तरह

माहौल में भर गया है 

दहशत का भयानक स्वर। 


लाखों बरसों से संचित 

मनुष्य के अकूत ज्ञान ने

प्रयोगशाला में जन्म दिया है 

घातक विष और 

आदमखोर वायरस को

कराह रहा है सारा संसार 

लहूलुहान है संवेदनाऐं

शर्मसार मानवता। 


अरक्षित समपारों पर हो रहे हैं

ख़तरनाक हादसे 

अथाह कोलाहल में नहीं सुनाई देती हैं 

सुबकियां। 


सूर्य के घोड़े भाग रहे हैं अपनी रफ्तार से

रात के सन्नाटे में बजता गजर 

घोषणा कर रहा है 

समय के साथ जीवन के बीत जाने की

दिन रात की सलीब पर

ढो रहा है 2021

अपने बीमार, तड़पते 

हांफते शरीर को

मरते मरते प्रार्थना कर रहा है 

महामारी से मुक्ति की 

विश्व शांति की। 


जल्दी ही

जल्दी ही

गुजर जायेगा तूफान 

थम जायेगी बारिश और

खिलेगी चमकदार धूप।


घोंसले में दुबक कर बैठी चिड़िया

झटक कर अपने भीगे पंख

उड़ जायेगी फुर्र से

पेड़ की फुनगी पर धूप सेंकते

चहचहायेगी खुशी से।


जल्दी ही

दुनिया बन जायेगी दरवाजा

और

चली आयेंगी इच्छाएँ बेधड़क।


सर्द रातों की कसमसाती नींद

महसूस करेगी राहत का कुनकुनापन

धीरे-धीरे पैर पसारेंगे आंखों में अच्छे सपने।


सहमी हुई हवा में होगी हलचल

मुस्कुरायेंगी समन्दर की लहरें

और क्षितिज से टकराकर गूंज उठेंगी

हमारी ख़ामोश प्रार्थनाएं।


जल्दी ही

नई दुनिया की खुली आबोहवा में

पृथ्वी बन जायेगी गेंद

जिसे किलकारियाँ मारते बच्चे

लुढ़कायेंगे अपने नन्हें हाथों से।


रश्मि रमानी, इंदौर, मो. 9827261567