अप्राप्य का सुख

डॉ. सांत्वना श्रीकांत, दिल्लीमो.882666950 


मैंने प्रेम होने का इतिहास

दर्ज कर दिया है

तुम्हारे माथे पर,

दंतकथाओं के साक्ष्य भी

कर दिए हैं समर्पित तुम्हें,

तुम्हारे स्वयं में होने के

मायने कर दिए हैं लिपिबद्ध।

अंकित कर दिया है

अपने वर्तमान और

भविष्य में तुम्हें....

ताकि सदियों तक

जीवित रहे-

अप्राप्य का सुख