दीप

आगन्तुक!!

तुम आना

सदैव की भांति

मुस्कान लिए होठों पर

लाना हाथों में

बहुत सारी दुआएं संग अपने

और

करना रौशन

घर मेरा

अनंत 

खुशियों के दीप जलाकर











अरुणा शर्मा, दिल्ली, मो. 9212452654


Popular posts from this blog

भारतीय साहित्य में अन्तर्निहित जीवन-मूल्य

कर्मभूमि एवं अन्य उपन्यासों के वातायन से प्रेमचंद      

बाल स्वरूप राही